तू राजा की छोरी मैं सूं डमरु वाला रै

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

मेरा बणकै बन्दडा आजा भोले ले जा डोली हो,

तेरी गेल्या चालूंगी फेर बणके भोली हो,

तेरी गेल्या चालूंगी फेर बणके भोली हो…….

हो ज्यागी बीरान घणी रंग पड़ ज्या काला रै,

हो ज्यागी बीरान घणी रंग पड़ ज्या काला रै,

तू राजा की छोरी मैं सूं डमरु वाला रै,

तू राजा की छोरी मैं सूं डमरु वाला रै……..

घणे दिन की सपने देखूं सूं,

ना करिये तू झोड़ा,

तेरा मेरा एंडी लागै,

भोले यो जोड़ा,

हाँ तेरा मेरा एंडी लागै,

भोले यो जोड़ा……

कती झोली करकै माँगू सूं,

मेरी भर दे झोली हो,

तेरी गेल्या चालूंगी फेर बणके भोली हो,

तेरी गेल्या चालूंगी फेर बणके भोली हो………

तू सोने की मैं पीली सै,

मेरे नाग रहवै गल में,

तेरी रह-रह माटी हो ज्यागी,

मेरी गेल्याँ जगल में,

तेरी रह-रह माटी हो ज्यागी,

मेरी गेल्याँ जगल में……

मैं भाँग रगड़ कै पीऊं रोज,

ना करता टाला ला रै,

तू राजा की छोरी मैं सूं डमरु वाला रै,

तू राजा की छोरी मैं सूं डमरु वाला रै…

मैं नखरे वखरे शिव शम्भू,

ना कदे दिखाऊँगी,

प्याऊँ घोट के भाँग,

मैं तेरी टहल बजाऊँगी,

प्याऊँ घोट घोट के भाँग,

मैं तेरी टहल बजाऊँगी…….

मैं बण के रहूँगी दासी मन्ने लेजा तौली हो,

तेरी गेल्या चालूंगी फेर बणके भोली हो,

तेरी गेल्या चालूंगी फेर बणके भोली हो…….

घणी हठीली पार्वती तू मार गयी बाजी,

मस्त मलंगा भोला यो तन्ने कर लिया राजी,

मस्त मलंगा भोला तन्ने कर लिया राजी…….

अजय हूडा बरके भक्तां का रहूँ सदा रूखाला रै,

तू राजा की छोरी मैं सूं डमरु वाला रै,

तू राजा की छोरी मैं सूं डमरु वाला रै…….

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।