जय हो भोले

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

शिव समाधि में बैठे,

शिव समाधि में बैठे,

पार्वती संग रहते…….

हाथ जोड़े भक्त बोले,

जय हो भोले, जय हो भोले,

हाँ तू ही मुक्ति द्वार खोले,

जय हो भोले, जय हो भोले……

शिव समाधि में बैठे,

पार्वती संग रहते……

हाथ जोड़े भक्त बोले,

जय हो भोले, जय हो भोले,

हाँ तू ही मुक्ति द्वार खोले,

जय हो भोले, जय हो भोले……

हो मन में तेरी आस्था की ज्योत जागी,

हाँ, हम भी तेरी भक्ति में हो गये बैरागी……

शिव पे भस्म चढ़ा है,

द्वार नंदी खड़ा है,

शिव पे भस्म चढ़ा है,

द्वार नंदी खड़ा है….

खाल ओढ़े भाल चंद्र,

तो योगमग्न बड़ा है…..

शिव समाधि में बैठे,

शिव समाधि में बैठे,

सारे शिवगण कहते हैं……

रुद्र माला तू पिरोले,

जय हो भोले, जय हो भोले,

हाँ डमरू पे संसार डोले,

जय हो भोले, जय हो भोले……..

शिव समाधि में बैठे,

पार्वती संग रहते……..

हाथ जोड़े भक्त बोले,

जय हो भोले, जय हो भोले,

हाँ तू ही मुक्ति द्वार खोले,

जय हो भोले, जय हो भोले………

भोले भोले,

जय हो भोले, जय हो भोले,

भोले भोले,

जय हो भोले, जय हो भोले…..

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।