चल रे मुसाफिर

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

ओ मेरे भोले तेरी कृपा से हमको सब कुछ मिला,

तू है आदि तू ही अनंता तुझ से ही सब हुआ,

ओ मेरे भोले बाबा ओ मेरे भोले बाबा आया दर तेरे आया,

कर दे करम अब तो अब न सबर मुझको आया दर तेरे आया………..

चल रे मुसाफिर हमको भी ले चल भोले के दरबारे में,

झूम झूम नचेंगे झूम झूम गाएँगे भोले के दरबारे में,

चल रे मुसाफिर हमको भी ले चल भोले के दरबारे में,

झूम झूम नचेंगे झूम झूम गाएँगे भोले के दरबारे में……….

चाहे पग में काँटे गड़े मंज़िल तो बस तू चाहिए,

अब जग से में कहता रहु सब मिलकर उसके दर जाईये,

झूम झूम नचेंगे झूम झूम गाएँगे भोले के दरबारे में,

चल रे मुसाफिर हमको भी ले चल भोले के दरबारे……….

तू है बाबा बेटा हु में तेरे सिवा कुछ न जाणु में,

तेरी महिमा सबनने कही दर से न जाये खाली कोई,

झूम झूम नचेंगे झूम झूम गाएँगे भोले के दरबारे में,

चल रे मुसाफिर हमको भी ले चल भोले के दरबारे……..

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।