रण चली रे भवानी

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

लप लप जीब निकाली रण चली भवानी,

चली रे भवानी रण चली रे भवानी,

मुंडुल मालाधारी रण चली रे भवानी,

लप लप जीब निकाली रण चली रे भवानी....

माथे पे मुकुट कान में बाली...-2

मुंडुल मालाधारी रण चली रे भवानी,

लप लप जीब निकाली रण चली रे भवानी....

दानव मारन चली रे भवानी...-2

लेकर फरसाधारी रण चली रे भवानी,

लप लप जीब निकाली रण चली रे भवानी.....

बड़ी बड़ी मैया ने आँखे निकाली,

प्यारी प्यारी मैया ने आँखे निकाली,

आज भई मतवाली रण चली रे भवानी,

लप लप जीब निकाली रण चली रे भवानी....

लाल तुमारा अर्जी करे है...-2

मैया रक्षा करो हमारी रण चली रे भवानी,

लप लप जीब निकाली रण चली रे भवानी...

दानव मार दिए मैया ने...-2

भरलय कुण्डा खाली रण चली रे भवानी,

लप लप जीब निकाली रण चली रे भवानी.....

पहाड़ो वाली मैया रणत भवानी,

शेरोवाली मैया रणत भवानी,

मैया लेकर खप्पर भारी रण चली रे भवानी,

लप लप जीब निकाली रण चली रे भवानी.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।