फागुन में उड़े रे गुलाल कहियो नंदरानी से

मीरा बाई
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

फागुन में उड़े रे गुलाल कहियो नंदरानी से,

कहियो नंदरानी से कहियो नंदरानी से,

फागुन में उड़े रे गुलाल....

म्हारी तो राधा गोरी गोरी,

गोरी गोरी राधा गोरी गोरी,

श्याम सलोने नंदलाल कहियो नंदरानी से,

फागुन में उड़े रे गुलाल....

म्हारी तो राधा भोली भाली,

भोली भाली राधा भोली भाली,

नटखट नंद को लाल कहियो नंदरानी से,

फागुन में उड़े रे गुलाल....

राधा के हाथों में चूड़ियां सोहैं,

चूड़ियां सोंग राधे कंगन सोंहैं,

बंसी बजावे नंदलाल कहियो नंदरानी से,

फागुन में उड़े रे गुलाल....

राधा के माथे पर बिंदिया सोहै,

बिंदिया सो है राधा बिंदिया सोहै,

मोर मुकुट नंदलाल कहियो नंदरानी से,

फागुन में उड़े रे गुलाल....

मीरा के प्रभु गिरिधर नागर,

गिरधर नागर गिरधर नागर,

संग नाचे नंदलाल कहियो नंदरानी से,

फागुन में उड़े रे गुलाल....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।