सोये हुए भाग्य जगा जा शेरावालिये

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

शेर पे सवार होके,

आजा शेरावालिये,

सोये हुए भाग्य,

जगा जा शेरावालिये,

शेरावालिये माँ ज्योतावालिये,

शेरावालिये माँ लाटावालिये,

शेर पे सवार होकें,

आजा शेरावालिये॥

ज्योत माँ जगा के तेरी,

आस ये लगाई है,

जिनका ना कोई उनकी,

तू ही माँ सहाई है,

रौशनी अंधेरों में,

दिखा जा शेरावालिये,

शेर पे सवार होकें,

आजा शेरावालिये,

शेरावालिये माँ ज्योतावालिये,

शेरावालिये माँ लाटावालिये,

शेर पे सवार होकें,

आजा शेरावालिये॥

रखियो माँ लाज इन,

अखियों के तारों की,

डूबने न पाए नैया,

हम बेसहारो की,

नैया को किनारे से,

लगा जा शेरावालिये,

शेर पे सवार होकें,

आजा शेरावालिये,

शेरावालिये माँ ज्योतावालिये,

शेरावालिये माँ लाटावालिये,

शेर पे सवार होकें,

आजा शेरावालिये॥

सच्चे दिल से ध्यानु जी ने,

जब था बुलाया माँ,

कटा हुआ शीश तूने,

घोड़े का लगाया माँ,

भक्तों की आन को,

बचा जा शेरावालिये,

शेर पे सवार होकें,

आजा शेरावालिये,

शेरावालिये माँ ज्योतावालिये,

शेरावालिये माँ लाटावालिये,

शेर पे सवार होकें,

आजा शेरावालिये......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।