भोलेनाथ का मैं बंजारा

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

भोले नाथ का मैं बंजारा,

छोड़ दिया मैंने जग सारा,

पता बता दो नीलकंठ का,

पता बता दो नीलकंठ का,

मैं जाऊ शिव धाम,

के मुझे कही नहीं जाना,

शिव का मैं हु सवाली.....

भटक रहा हूँ जंगल जंगल,

छोड़ दिया है मैंने अनजल,

जब तक भोले नहीं मिलेगे,

करू नहीं आराम,

के मुझे कही नहीं जाना,

शिव का मैं हूँ सवाली....

शिव सेवक हूँ मैं मतवाला,

बाबा मेरा देव निराला,

ढुंडत ढुंडत शिवशंकर को,

ढुंडत ढुंडत शिवशंकर को,

सुबह से हो गई शाम,

के मुझे कही नहीं जाना,

शिव का मैं हूँ सवाली.....

यो भी मिला है मुझे हाथ से,

काम करूँगा दोनों हाथ से,

पैरो की उपकार में उसका,

पैरो की उपकार में उसका,

मानूँगा आठो याम,

के मुझे कही नहीं जाना,

शिव का मैं हूँ सवाली....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।