गुरा ने तैनु याद करया

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॥ पावन पाठ ॥

कागा बोलया बनेरे उत्ते बैके,

गुरा ने तैनु याद करया,

दर्शन कर ले तू गुरा कोल जाके,

गुरा ने तैनु याद करया....

ऐ ता मेरे गुरा दा स्नेहा ले आया है,

आके मैनु दस्से तैनू गुरा ने बुलाया है,

विच बोले अपनी मीठी मीठी बोली, गुरा ने तेनु याद करया

कागा बोलया....

बिन भागा दर्शन नहिओ हुँदा,

दर्श बिना मन बेमन हुँदा,

मै ता जाणा ओथे शीश झुकोणा, गुरा ने तेनु याद करया

कागा बोलया....

हाथ जोड़ गुरा दे द्वारे मै ता चल पई,

गुरा दे प्यार विच सुद्ध बुद्ध भूल गई,

ओथे रहमता ने मीह बरसाया, गुरा ने तेनु याद करया

कागा बोलया....

सतगुरू प्यारे मेरे दर्श दिखाउंदे ने,

पल विच सारया दें दुख मिट जानदे ने,

ओथे नाम वाला रंग चढ जांदा, गुरा ने तेनु याद करया

कागा बोलया....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।