हनुमत जैसा रूप तुम्हारा

पारंपरिक
हनुमान जी भजन हनुमान भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

तर्ज - रब जैसा रूप तुम्हारा

हनुमत जैसा रुप तुम्हारा, कोठारी कुल उजियारा

हो माँ छगनी का प्यारा, भक्तो का पालनहारा,

बाबोसा नाम तुम्हारा, प्राणों से भी प्यारा

हनुमत जैसा रुप तुम्हारा......

शीश मुकुट है कानो में कुंडल, हाथ में घोटा सोहे,

तन केसरिया बागा पहने, रूप ये मन को मोहे,

जैसे सूरज जैसे चंदा, वैसे चमके बाबा हमारा,

हनुमत जैसा रुप तुम्हारा......

फूलों की खुशबू में तुम हो, कलियों में तुमसे रंग है,

रोशन है दुनिया ये तुमसे, रहते हो भक्तो के संग है,

तूही सहारा नाथ हमारा, दिलबर तुझपे जीवन वारा

हनुमत जैसा रुप तुम्हारा......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।