छठ घाट चलो चलें

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

छठ घाट चलो चलें,

वहां अद्भुत है नजारा,

माता बहने सब आई हैं

घि के दीप जलाई है

सूर्य देव को न्योता देकर,

घाट पर उन्हें बुलाई है,

उख और नारियल गौ के दूध से,

पूजन होगा सारा,

छठ घाट चलो चलें,

वहां अद्भुत है नजारा॥

बास कि बहंगी कंधे ऊपर, कोई लेकर आता है,

कोई छठ मैया की महिमा, गाकर हमें सुनाता है,

सुने कोख को भरने वाली,

दुख कष्टों को हरने वाली,

छठ व्रत करने वालो कि मां,

खुशी से आंचल भरने वाली,

अरघ के लिए सुप मे बहता, है जहां दूध की धारा,

छठ घाट चलो चलें,

वहां अद्भुत है नजारा॥

ठंडे पानी के भीतर, होकर खड़ा गुणगान करें,

फल देती है छठ मैया, जो जो भी इनका ध्यान करें,

चलो चलें सब घाट के ऊपर, मां को शीश झुकाएंगे,

स्वर्ग का दृश्य जमी पर होगा, दर्शन करके आएंगे,

तन को वहां सुकून मिले, मन का मीटे अंधियारा,

छठ घाट चलो चलें,

वहां अद्भुत है नजारा॥

पुत्र के सुख से वंचित जो भी, माँ के व्रत को करता है,

तन मन धन और धैर्य से जो, माँ का उपास ना धरता है,

दुःख और दर्द मिटा देती हे भय को दूर भगा देती है,

किस्मत ज्योत जलाने वाली किस्मत को चमका देती है,

फल और फूल से घाट सजा है लगता बड़ा ही प्यारा,

छठ घाट चलो चलें,

वहां अद्भुत है नजारा॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।