हे श्यामा गजब गाव महिनाम

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन दुर्गा भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

हे श्यामा गजब गाव महिनाम,

जाहि में आहाँ बिराजी मां,

हे काली गजब गाव महिनाम,

जाहि में आहाँ बिराजी मां॥

पूरब दिस माँ दुर्गा बिराजथी,

चन्द्रेस्वर छथ संग,

पच्छिम बाबा भूत नाथ छथ,

पार्वती के संग,

ओहू ठाम अहि विराजी माँ,

हे श्यामा गजब गाव महिनाम....

उत्तर में माँ काली बिराजत,

बाबा बालेस्वर नाथ,

दक्छीन हरिहर खूब सजल छथ,

गौरी दाई के नाथ,

चारु दिस अहि बिराजी माँ,

हे काली गजब गाव महिनाम....

सीताराम जी के मंदिर चमके,

गाम बीच बजरंग बली बास,

बुरहा बाबा ब्रम्ह बाबा जी सबके,

पूर्ण करै छथ आस,

सब मिल आहाँ के मनाबी माँ,

हे काली गजब गाव महिनाम....

धूप गूगल स मंदिर गमकै,

अड़हुल माला लाल,

अद्भुद रूप भक्त सब निरखैथ,

सबके करू निहाल,

प्यासा भजन सुनाबै माँ,

हे मईया गजब गाव महिनाम....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।