कन्हैया आया तेरे द्वार

संजय मित्तल
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

हे नन्द नंदन,

करते है वंदन,

दे दो थोड़ा प्यार,

कन्हैया आया तेरे द्वार,

कन्हैया आया तेरें द्वार॥

तीनों लोक के अंतर्यामी,

राधा जी के तुम हो स्वामी,

मुझ निर्बल के काज सवारों,

मुझ निर्बल के काज सवारों,

कर दो भव से पार,

कन्हैया आया तेरें द्वार,

कन्हैया आया तेरें द्वार॥

पूजा भक्ति मैं नहीं जानू,

अपना सब कुछ तुमको मानु,

मन मंदिर में आन विराजो,

मन मंदिर में आन विराजो,

कर मेरा उद्धार,

कन्हैया आया तेरें द्वार,

कन्हैया आया तेरें द्वार॥

‘शर्मा’ तू भी श्याम रिझा ले,

सोई किस्मत अपनी जगा ले,

प्रेम भाव से ‘संजय’ गा कर,

प्रेम भाव से ‘संजय’ गा कर,

कर ले प्रभु से प्यार,

कन्हैया आया तेरें द्वार,

कन्हैया आया तेरें द्वार.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।