भोले जैसा देव नहीं है

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

होली खेले मसाने में,

होली खेले मसाणे में,

होली खेले मसाने में,

होली खेले मसाणे में,

भूत भयंकर नाच रहे हैं,

भूत भयंकर नाच रहे हैं,

भोले संग मसाने में,

होली खेले मसाने में,

होली खेले मसाणे में,

ॐ नमः शिवाय,

ॐ नमः शिवाय……….

पी के भंगा, मस्त मलंगा,

कर त्रिशूल उठाए हैं,

डम डम डमरू बाज रहा है,

कैसी धूम मचाए हैं,

कैसी धूम मचाए हैं,

भोले जैसा देव नहीं है,

भोले जैसा देव नहीं है,

दूजा और जमाने में,

होली खेले मसाने में,

होली खेले मसाणे में,

ॐ नमः शिवाय,

ॐ नमः शिवाय……..

अंग भभूति रमा रहे और,

माथे सोहे चंदा है,

अंग भभूति रमा रहे और,

माथे सोहे चंदा है,

लगा समाधि बैठ गए हैं,

जटा से बहती गंगा है,

गले में विषधर काले देखो,

मस्त फुंकार लगाने में,

होली खेले मसाने में,

होली खेले मसाणे में,

ॐ नमः शिवाय,

ॐ नमः शिवाय……..

सब देवों में देव निराले,

महादेव कहलाते हैं,

सब देवों में देव निराले,

महादेव कहलाते हैं,

दीन प्रहण औघड़ दानी का,

दानव भी गुण गाते हैं,

सतपाल रोहटिया महिमा गावे,

तेरी रोहटिया महिमा गावे,

मस्त रहे तेरे गाने में,

होली खेले मसाने में,

होली खेले मसाणे में,

ॐ नमः शिवाय,

ॐ नमः शिवाय………

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।