तुझे पिता कहूं या माता

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

तुझे पिता कहूं या माता,

तुझे मित्र कहूं या भ्राता,

सौ सौ बार नमन करता हूँ,

चरणों में झुकाकर माथा,

तुझे पिता कहूँ या माता………

ॐ हरि ॐ हरि ॐ हरि ॐ,

ॐ हरि ॐ हरि ॐ हरि ॐ

जो भी आया दर पर तेरे,

तूने बात ना उसकी टाली,

प्रभु तेरी कुदरत से ही,

एक हाथ से बज जाए ताली,

जो तेरे दर का भिखारी,

वो कुछ ना कुछ तो पाता,

सौ सौ बार नमन करता हूँ,

चरणों में झुकाकर माथा,

तुझे पिता कहूँ या माता………

ॐ हरि ॐ हरि ॐ हरि ॐ,

ॐ हरि ॐ हरि ॐ हरि ॐ

जिस भक्त ने तुझे पुकारा,

तू आके ह्रदय में समाया,

कभी भक्त की करुणा सुनकर,

तूने उसका कष्ट मिटाया,

कण कण में तू ही बसा है,

पर कही नज़र नही आता,

सौ सौ बार नमन करता हूँ,

चरणों में झुकाकर माथा,

तुझे पिता कहूँ या माता……….

ॐ हरि ॐ हरि ॐ हरि ॐ,

ॐ हरि ॐ हरि ॐ हरि ॐ

है धरा पाप से बोझल,

तब हमने तुझको पुकारा,

अब धीरज ड़ोल रहा है,

तू दे दे हमे सहारा,

बिन तेरे इस दुनिया में,

हमें कोई नज़र नही आता……….

सौ सौ बार नमन करता हूँ,

चरणों में झुकाकर माथा,

तुझे पिता कहूँ या माता………

ॐ हरि ॐ हरि ॐ हरि ॐ,

ॐ हरि ॐ हरि ॐ हरि ॐ

तुझे पिता कहूं या माता,

तुझे मित्र कहूं या भ्राता,

सौ सौ बार नमन करता हूँ,

चरणों में झुकाकर माथा,

तुझे पिता कहूँ या माता……..

ॐ हरि ॐ हरि ॐ हरि ॐ,

ॐ हरि ॐ हरि ॐ हरि ॐ

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।