मन प्राण बुद्धि हो प्रबल

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मन प्राण बुद्धि हो प्रबल,

चित्त विमल कर दे शारदे,

उठे मन में उद्रेक सात्विक,

उद्दात भाव का सार दे।।

हे ज्ञानेश्वरी हे योगेश्वरी,

माँ सरस्वती वागेश्वरी,

निपट मूर्ख ये दास तेरा,

ज्ञान ज्योति का संचार दे,

मन प्राण बुद्धि हों प्रबल,

चित्त विमल कर दे शारदे।।

श्वेतवर्णी कमल आसिनी,

हंस वाहिनी ज्ञान दायिनी,

सुदृढ़ हो हर कर्म लक्ष मेरा,

ऐसा संकल्पित विचार दे,

मन प्राण बुद्धि हों प्रबल,

चित्त विमल कर दे शारदे।।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।