सच्चे नाम वाली बूटी

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॥ पावन पाठ ॥

सच्चे नाम वाली बूटी मेरे गुरां ने पिलाई।

प्यासी आत्मा सी मेरी प्यास उसदी बुझाई ।।

रेहा भटकदा मैं दर-दर,दुर-दूर होई,

मेरी आत्मा निमाणी कई-कई वार रोई,

दित्ता ग्यान वाला छिट्टा तद् होश मैंनू आई।

मेरे गुरां मेरे उत्ते उपकार कीता ऐ,

पंजा वैरीयां नूँ सत्गुरां मार दित्ता ऐ,

रोग हो गये ने नाश ऐसी दित्ती ऐ दवाई।

"अजय" भुल्लेया ई फिरदा सी गुरां वाला द्वारा,

विच्च नेरेया दे आखर च होया उजिआला,

मैनूँ आ गई ऐ होश मेरी रूह रुशनाई।

पं-अजय वत्स

महदूद|

9478062295

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।