शिव शम्भो

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

शिव शम्भो शिव शम्भो,

शम्भो करतो सब संभव,

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्,

उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

बड़े भाग्य से मिला है जीवन,

जीव जगत जल थल कण कण,

अंडज पिंडज जड़ चेतन,

सब में है शिवयम वंदन,

शिव शम्भो शिव शम्भो,

शम्भो करतो सब संभव॥

यह भवसागर की उथल पुथल,

और कर्मो के लेख अटल,

हर हर दानी ध्यानी ने,

तीन लोक शिव विश्व पटल,

शिव शम्भो शिव शम्भो,

शम्भो करतो सब संभव।

शिव शम्भो शिव शम्भो

शम्भो करतो सब संभव

शिव शम्भो शिव शम्भो

शम्भो करतो सब संभव

शिव शम्भो शिव शम्भो

शम्भो करतो सब संभव

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्

उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।