भोले का भंडार

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

ॐ नमः शिवाय

मृगछालो पर वास करे, है शिव शंकर

दुष्टों का जो नाश करे, है शिव शंकर………

पूरी मन की आस करें है शिव शंकर

पर्वत पर निवास करे है शिव शंकर....

शिव मे सब है,सब मे शिव है

जिसको ए एहसास हुआ……..

वो छोड़के दुनिया की माया

भोले शंकर के पास हुआ……..

वो छोड़के दुनिया की माया

भोले चरणों के पास हुआ……..

कंकर में शंकर, शंकर में सारा ए संसार बसा,

भोले हैं उनके जिनके, मन में भक्ति का धार बसा,

जिसने पूजन की भोले की, कभी ना वो निराश हुआ………

वो छोड़के दुनिया की माया,

भोले शंकर के पास हुआ…

वो छोड़के दुनिया की माया,

भोले चरणों के पास हुआ…

है त्रीलोकी जग के स्वामी, विश को पीने वाले हैं,

जीवन नैया पार करे ए, दुख को हरने वाले हैं...-2

जिन भक्तों को शिव चरणों के,

ऊपर है विश्वास हुआ...

वो छोड़के दुनिया की माया,

भोले शंकर के पास हुआ…

वो छोड़के दुनिया की माया,

भोले चरणों के पास हुआ…

अपने रंग मैं रंग ने वाले,

भोले तो भंडारी है,

शिव के ऊपर तन मन,

धन और जीवन तो बलिहारी है,

माया से जो दूर हुआ,

त्रिलोकी का वो ख़ास हुआ…..

वो छोड़के दुनिया की माया,

भोले शंकर के पास हुआ…

वो छोड़के दुनिया की माया,

भोले चरणों के पास हुआ…

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।