गजानन एसो फस गयो रे

पारंपरिक
श्री गणेश भजन गणेश भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

दो नारीन के बीच गजानन एसो फस गयो रे॥

माथे का टीका रिद्धि मांगे,

सिद्धि मांगे गुरु ज्ञान गजानन एसो फस गयो रे,

दो नारीन के बीच गजानन एसो फस गयो रे॥

कानों के झुमके रिद्धि मांगे,

नाक की नथिनी रिद्धि मांगे,

सिद्धि मांगे गुरु ज्ञान गजानन एसो फस गया रे,

दो नारीन के बीच गजानन एसो फस गयो रे॥

गले का हरवा रिद्धि मांगे,

सिद्धि मांगे गुरु ज्ञान गजानन ऐसो फस गयो रे,

दो नारीन के बीच गजानन एसो फस गयो रे॥

पैरों की पायल रिद्धि मांगे,

सिद्धि मांगे गुरु ज्ञान गजानन ऐसो फस गयो रे,

दो नारीन के बीच गजानन एसो फस गयो रे॥

हाथों के कंगना रिद्धि मांगे,

सिद्धि मांगे गुरु ज्ञान गजानन ऐसो फस गयो रे,

दो नारीन के बीच गजानन एसो फस गयो रे॥

अंगों का लहंगा रिद्धि मांगे,

सिद्धि मांगे गुरु ज्ञान गजानन ऐसो फस गयो रे,

दो नारीन के बीच गजानन एसो फस गयो रे॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।