मोरी पीड़ हरो तुम बिन कौन हमारो

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मोरी पीड़ हरो तुम बिन कौन हमारो।।

द्रुपद सुता के चीर बढ़ायो ।

पट के बीच पधारियो,

ग्राह से गज़ के फंड छुडायो

नंगे पांव पधारियो।

मोरी पीड़ हरो तुम बिन कौन हमारो।।

जन्मों की श्रापित नारी को

प्रभुवर तुमने तारयो।

दण्डक वन प्रभु पावन कोन्हों,

ऋषियन त्रास मिटायो।।

मोरी पीड़ हरो तुम बिन कौन हमारो।।

भक्त प्रह्लाद के प्राण बचायो,

हिरण्यकश्यप को मार्यो,

राजेन्द्र तुमसे भिक्षा मांगे

अबकी मोहे तारो ।।

मोरी पीड़ हरो तुम बिन कौन हमारो।।

गीतकार/गायक-राजेन्द्र प्रसाद सोनी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।