नमामि नमामि अवध के दुलारे

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

नमामि नमामि अवध के दुलारे,

खड़ी हाथ बाधे मैं दर पे तुम्हारे,

नमामि नमामि अवध के दुलारे,

खड़ी हाथ बाधे मैं दर पे तुम्हारे।

ना करती हूं भक्ति ना जप योग साधन,

कैसे कटेंगे ये माया के बंधन,

दुखी दीन होकर ये मनवा पुकारे,

नमामि नमामि अवध के दुलारे,

खड़ी हाथ बाधे मैं दर पे तुम्हारे.....

भवर में पड़ी हैं आकर ये नईया,

सहारा ना दूजा एक आस तेरी,

तू बन के खेवइया लगादे किनारे,

नमामि नमामि अवध के दुलारे,

खड़ी हाथ बाधे मैं दर पे तुम्हारे....

विनती यहीं है प्रभु के चरणों में,

आए है हम सब तुम्हारे शरण में,

करो दूर अवगुण जो है हमारे,

नमामि नमामि अवध के दुलारे,

खड़ी हाथ बाधे मैं दर पे तुम्हारे....

नमामि नमामि अवध के दुलारे,

खड़ी हाथ बाधे मैं दर पे तुम्हारे ।

Shweta Pandey (Varanasi)

"मधुर भजन बेला"

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।