आजा आजा भोलेनाथ

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

सुख पाऊँ थारे, पाया में पढ़के,

आजा आजा भोले नाथ, नंदी पर चढ़के,

गोरा के सुख पावे, जिदपे अड़के,

आज ब्याह रचावे, दुःख पावे तड़के....

दूल्हा बन जाओ त्रिपुरारी, संग में हो बारात भी सारी,

तू राजा की राजदुलारी, भोगे ऐश आनंदी सारी,

गेरू वर माला में आगे बढ़के....-2

आजा आजा भोले नाथ नंदी पर चढ़कर.....

भूत और प्रीत रहे मने घेरे, मेरे लगे श्मशान में डेरे,

जन्म जन्म के हो पति मेरे, थारे संग में ले लूं फेरे,

मर जागी गोरा भूखी सड़के....-2

आजा आजा भोले नाथ नंदी पर चढ़कर....

मेरे हो जाओ अविनाशी, में थारे दर्शन की प्यासी,

मने ना ममता मेर जरा सी, सुख पाऊं रह के संन्यासी,

फेरु थारी माला साँझ तड़के....-2

आजा आजा भोले नाथ नंदी पर चढ़कर.....

मैं शिव हूँ तू आदिशक्ति, मैं भगवान तू मेरी भक्ति,

जिसकी लगन थारे ते लगती, कदे ना माया उनको ठगती,

जावे " भूलन " मोह माया ते लड़के....-2

आजा आजा भोले नाथ नंदी पर चढ़कर.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।