हे वीर भक्त बजरंग बली

पारंपरिक
हनुमान जी भजन हनुमान भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

हे वीर भक्त बजरंग बली,

मैं तुझको आज रिझाता हूँ,

हे सिया चरण के दास मैं तेरी,

महिमा के गुण गाता हूँ……..

जय हो जय हो, जय हो जय हो,

जय हो जय हो, जय जय हो………

जब मेघनाथ का बाण चला,

लक्ष्मण को घायल कर डाला,

श्री राम की धीरज टूट गई,

जाने वो क्षण कैसा आया,

बोले हनुमत धीरज रखियें,

बोले हनुमत धीरज रखियें,

संजीवन बूटी लाता हूँ,

हे सिया चरण के दास मैं तेरी,

महिमा के गुण गाता हूँ……….

जय हो जय हो, जय हो जय हो,

जय हो जय हो, जय जय हो………

है राम प्रभु का हाल ये जो,

माँ अंजनी जी से कह देना,

सूरज उगने से पहले ही,

संजीवनी बूटी ले आना,

तेरी रक्षा करेंगे राम प्रभु,

तेरी रक्षा करेंगे राम प्रभु,

तेरी शक्ति को आज जगाता हूँ,

हे सिया चरण के दास मैं तेरी,

महिमा के गुण गाता हूँ……….

जय हो जय हो, जय हो जय हो,

जय हो जय हो, जय जय हो………

सिता की चिंता तो हनुमत,

दिन रात ही खाई जाती है,

कैसे मैं अवध को जाऊंगा,

यही चिंता मुझे सताती है,

उलझन में फसे है प्राण मेरे,

उलझन में फसे है प्राण मेरे,

ये उलझन तुम्हे बताता हूँ,

हे सिया चरण के दास मैं तेरी,

महिमा के गुण गाता हूँ…….

जय हो जय हो, जय हो जय हो,

जय हो जय हो, जय जय हो……….

लाये हनुमत संजीवनी और,

सूरज को भी उगने ना दिया,

रावण के आगे राम का सर,

हनुमत ने कभी झुकने ना दिया,

है बात अमर ये दुनिया में,

है बात अमर ये दुनिया में,

‘आलम’ को यही समझाता हूँ,

हे सिया चरण के दास मैं तेरी,

महिमा के गुण गाता हूँ……….

जय हो जय हो, जय हो जय हो,

जय हो जय हो, जय जय हो……

हे वीर भक्त बजरंग बली,

मैं तुझको आज रिझाता हूँ,

हे सिया चरण के दास मैं तेरी,

महिमा के गुण गाता हूँ…….

जय हो जय हो, जय हो जय हो,

जय हो जय हो, जय जय हो……

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।