डमरू बाजे भोलेनाथ का

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

शिव तीनो लोक के स्वामी है,

शिव कैलाशो के वासी है,

सारे जग पर इनकी नजर रे,

भोले तो अंतर्यामी है,

है मन जिनके शिव बसते उनको डर की बात का,

जब डमरू बाजे भोलेनाथ का,

सारा धरती गगन ये नचता,

जब आँख तिसरी खोल दे तो काल भी थर थर कापता.....

भोले की मस्ती में हो के मगन,

नच रहा ये धरती गगन,

दुनिया की उसे हा परवाह नहीं,

मन मैं आधार है जिनके शिवम्,

शिव ही अँधेरा है शिव ही किरण,

वोही है अग्नि वोही पवन,

जीवन भी वो ही है चींटी भी वो ही है,

शिव मैं बसा है हर इक कान,

हाथो माई डमरू….. गले में नाग,

जट्टा माई गंगा…. आंखो माई आग,

मोह माया चोर के सारे जगत की,

बैठा है भोला कहीं सब कुछ त्याग के…..

जब तड़व करते भोले है,

आकाश पाताल भी डोले है,

सदियो जनमो से गुंज रहा एक नाम जो बम बम भोले है,

खुद पी कर विश का प्यारा वो अमृत देवो मैं बट्टा,

जब डमरू बाजे भोलेनाथ का,

सारा धरती गगन ये नचता,

जब आँख तिसरी खोल दे तो काल भी थर थर कापता......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।