मैं तेरे कालों तेन्नु मंगणा

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॥ पावन पाठ ॥

कुंझ मंगणा नई साइयाँ तेरे बाजों, मैं तेरे कालों तेन्नु मंगणा,

जग सामने वे वाली सारे जग दा ते फिर आसा तनु मंगना,

कुंझ मंगणा नई साइयाँ तेरे बाजों, मैं तेरे कालों तेन्नु मंगणा....

सुख दुःख गम ख़ुशी सब तेरी माया है,

माया विच तू है सारा जग भरमाया है,

रंग सारे ने कच्चे इस जग दे मैं रंगा विच तेरे रंगा,

कुंझ मंगणा नई साइयाँ तेरे बाजों, मैं तेरे कालों तेन्नु मंगणा.....

जे तू मिल जावे सानूं रहे कोई थोड ना,

जिंगदी च फेर पेणी कदे कोई लोड ना,

आज मंगणा है आखिरी वारि मैं मंगणो भी नहियो संगणा,

कुंझ मंगणा नई साइयाँ तेरे बाजों, मैं तेरे कालों तेन्नु मंगणा....

तेरेया बिछोड़ियाँ ने सप्प जेहरीले ने,

सुध बुध हर लेंदे बड़े ही नशीले ने,

छेत्ति ले ले खबर साहिल दी तू वर्ण एहना ने डंगणा,

कुंझ मंगणा नई साइयाँ तेरे बाजों, मैं तेरे कालों तेन्नु मंगणा…..

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।