शंभू ये तेरी माया

पारंपरिक
महादेव भजन साईं भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

शंभू ये तेरी माया,

कहीं है धूप,

कहीं है छाया………..

शंभू ये तेरी माया,

कहीं है धूप,

कहीं है छाया……….

खुद तूने विष पिया,

ऑरो को अमृत पिलाया,

तेरे जैसा योगी ना मिला है,

ना पाया………..

सांसें तब तक चलेगी,

जब तक रहेगा तेरा साया,

भोले………

शंभू ये तेरी माया,

कहीं है धूप,

कहीं है छाया…………

शंभू ये तेरी माया,

कहीं है धूप,

कहीं है छाया……….

तू अघोरी भस्म सनी तेरी काया,

त्रिशूल उठा के तांडव जबो,

डमरू बांध दमय………..

तू अघोरी भस्म सनी तेरी काया,

त्रिशूल उठा के तांडव जबो,

डमरू बांध दमय…………

कांपी ये धारी जग घबराये,

अंबर थार थराये……….

शंभू ये तेरी माया,

कहीं है धूप,

कहीं है छाया,

भोले………..

शंभू ये तेरी माया,

कहीं है धूप,

कहीं है छाया…………

औरो को दौलत बातें,

खुद से दूर मोह माया,

औरो को दौलत बातें,

खुद से दूर मोह माया……..

सांसो में योगी,

योगी में संसार समय………

शंभू ये तेरी माया,

कहीं है धूप,

कहीं है छाया………

शंभू ये तेरी माया,

कहीं है धूप,

कही है छाया………

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।