मैं देखूं जिस ओर प्रभु जी

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मैं देखूं जिस ओर प्रभु जी...-2

सामने तेरी सूरतिया..-2

मुख पर तेरा नाम प्रभु जी...-2

दिल में तेरी मूरतिया,

सामने तेरी सूरतिया॥

दर दर भटकूं हरि गुन गांऊ....-2

फिर भी तेरा दरस ना पाऊं,

तड़पूं निसदिन...

तड़पूं निसदिन ऐसो प्रभुजी,

जैसे जल मे माछरिया,

मैं देखूं जिस ओर प्रभु जी,

सामने तेरी सूरतिया॥

मैं कपटी खल कामी प्रभुजी...-2

कुटिल कुमारग गामी प्रभुजी,

पाप में मैं तो.....

पाप में मैं तो ऐसे डूबा,

जैसे जल मे गागरिया....-2

सामने तेरी सूरतिया,

मैं देखूं जिस और प्रभु जी,

सामने तेरी सूरतिया॥

मैं प्रभु तेरी शरण में आया....-2

चरणों मे प्रभु शीश झुकाया,

लाज हमारी.....

लाज हमारी अब तो राखो,

अब तो राखो सावरिया,

सामने तेरी सूरतिया,

मैं देखूं जिस ओर प्रभुजी...-2

सामने तेरी सूरतिया॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।