काली काली अमावस की रात में

पारंपरिक
महादेव भजन दुर्गा भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

काली काली अमावस की रात में,

काली निकली है भैरव के साथ में,

यह अमावस की रात बड़ी काली,

घूमने निकली मां महाकाली,

एक दानव का मुंड लिए हाथ में,

काली निकली है भैरव के साथ में,

काली काली....

केश बिखरे मां के काले काले,

नैना मैया के हैं लाल लाल रे,

काला कुत्ता है मैया के साथ में,

काली निकली है भैरव के साथ में,

काली काली....

रूप भैरव जी का काला काला,

यह तो है मैया काली का लाला,

बेटा घूमने चला मां के साथ में,

काली निकली है भैरव के साथ में,

काली काली....

वामन भैरव और 56 है करवा,

754 खेल रहे हो बरुआ,

चौसठ जोगणिया मैया के साथ में,

काली निकली है भैरव के साथ में,

काली काली....

मैया काली के मुख से निकले ज्वाला,

गले पहने है मुंडो की माला,

रूहै कापे हैं राही की रात में,

काली निकली है भैरव के साथ में,

काली काली अमावस की रात में,

काली निकली है भैरव के साथ में।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।