आया है आया वसंत त्योहार जी

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॥ पावन पाठ ॥

आया है आया वसंत त्योहार जी,

प्यार भी पिरोया है फूलों के संग हार में,

सतगुरा दे दर्शन पावागे हारा वाले दे जयकारे लावागे....

आज मैंने गुरुजी, दे दर्शन पा लिये,

पंगत प्यारेया नाल भंगड़े वी पा लिये,

सतगुरा दे जयकारे लावागे, हारा वाले दा दर्शन पावागे....

जाऊं बलिहारी में, दाता सतगुरु तेरे ते,

किरपा अपार हारा वाले तेरी मेरे ते,

मांगे हैं भक्ति हम तुमसे दातारे,

प्यार भी पिरोया है फूलों के संग हार में,

सतगुरा दे जयकारे लावागे, हारा वाले दा दर्शन पावागे....

दास ने तेरी जबसे महिमा जो गाई है,

घड़ी ये बसंत की आज जो आई है,

बज रही दर पे तेरे शहनाई है,

हारा वाले को सब देवे बधाइयां है,

दर्शनों की लाइन लगी है दरबार में,

प्यार भी पिरोया है फूलों के संग हार में,

सतगुरा दे जयकारे लावागे, हारा वाले दा दर्शन पावागे....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।