कैसा चक्कर चलाया रे श्याम तेरी उंगली ने

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

कैसा चक्कर चलाया रे श्याम तेरी उंगली ने,

जब ड्रॉपदी दुश्तो ने घेरी जब ड्रॉपदी दुश्तो ने घेरी,

कैसा चिर बढ़ाया रे श्याम तेरी उंगली ने,

कैसा चक्कर चलाया रे श्याम तेरी उंगली ने,

जहेर का प्याला रणजी ने भेजा, जहेर का प्याला रणजी ने भेजा,

जहेर का प्याला रणजी ने भेजा, जहेर का प्याला रणजी ने भेजा,

कैसा अमृत बनाया रे श्याम तेरी उंगली मेी,

कैसा चक्कर चलाया रे श्याम तेरी उंगली ने,

जब प्रहेलड कहाड़ मे गेरा, जब प्रहेलड कहाड़ मे गेरा,

कैसा कमाल खिलाया रे, श्याम तेरी उंगली ने,

कैसा चक्कर चलाया रे श्याम तेरी उंगली ने,

जब नर्सिंघ ने तुमको हेरा, जब नर्सिंघ ने तुमको हेरा,\

कैसा भाट भराया रे, श्याम तेरी उंगली ने,

कैसा चक्कर चलाया रे श्याम तेरी उंगली ने,

जब अर्जुन ने जैवरत को मारा, जब अर्जुन ने जैवरत को मारा,

कैसा सूरज छिपाया रे, श्याम तेरी उंगली ने,

जब जब भक्तो ने तुमको पुकारा, जब जब भक्तो ने तुमको पुकारा,

सबका कष्ट मिटाया रे, श्याम तेरी उंगली ने,

कैसा चक्कर चलाया रे श्याम तेरी उंगली ने,

कैसा चक्कर चलाया रे श्याम तेरी उंगली ने ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।