हंसा निकल गया काया से

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॥ पावन पाठ ॥

हंसा निकल गया काया से खाली पड़ी रही तस्वीर॥

खूब मनाये देवी देवता खूब मनाये पीर,

अब परवाना है उस घर का जाना पड़े अखिर॥

कोई रोबे कोई मलमल धोवे कोई उड़ावे चीर,

चार जने मिल कांधे उठामें ले जाएं जमुना तीर॥

जब यमदूत लेन को आने तनक घरे नहीं धीर,

मार मार के प्राण निकाले वहे‌ नैन से नीर॥

मोर मुल्क की क्या रे चलाई संग ना जावे शरीर,

जा जंगल में चिता बना दई कह गए दास कबीर॥

हंसा निकल गया काया से खाली पड़ी रही तस्वीर॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।