तुम बिनु राम नहीं कोउ मेरौ

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

तुम बिनु राम! नहीं कोउ मेरौ,

बिनु तव चरन-सरन सीतापति!

दीखै जगत अंधेरौ॥

जब से जनम लियो करुनामय परौ पाप सों भेरौ।

कबहुँ 'राम' मुख नाहिं उचारो, यह तन अघ कौ ढेरौ॥

काम-क्रोध मद लोभ मोह कौ, चित में तिमिर घनेरौ।

करुनानिधी चपल-मन मेरौ, सदा पाप कौ चेरौ॥

हे अघ हरन पतित पावन प्रभु, अबकी मोहि निबेरौ।

करुना-सागर करुना करके, कृपाकोर करि हेरौ॥

रघुबर पापी पतित नीच मति, निज-चरनन में फेरौ।

सुनहुँ सियापति है अशोक चित, तव पदकंज चितेरौ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।