कंकर कंकर बना है शंकर

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॥ पावन पाठ ॥

कंकर कंकर बना है शंकर माँ तेरे प्रताप से,

दरस तेरा भक्तों को छुड़ाए जीवन के हर ताप से,

हर हर नर्मदे हर, हर हर नर्मदे हर...

कल कल करके बहती जाए मां रेवा,

संत मुनि सब करते मां तेरी सेवा,

छाती तोड़ पर्वतों की तू बहती जाए चाव से,

दरस तेरा भक्तों को छुड़ाए जीवन के हर ताप से,

हर हर नर्मदे हर, हर हर नर्मदे हर....

कोई समझ न पाए तेरी गति न्यारी,

बूंद बूंद से सींचे जीवन की क्यारी,

संग तुझे न भाए किसी का बहती जाए चाव से,

दरस तेरा भक्तों को छुड़ाए जीवन के हर ताप से,

हर हर नर्मदे हर, हर हर नर्मदे हर....

चली अमरकंटक से तेरी अमर कहानी,

अमृत बन के बहता मां तेरा पानी,

पाप सभी मिट जाते हैं मां रेवा तेरे नाम से,

दरस तेरा भक्तों को छुड़ाए जीवन के हर ताप से,

हर हर नर्मदे हर, हर हर नर्मदे हर....

गायक एवं रचनाकार -मनोज कुमार खरे

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।