तू छोरा नंदबाबा का मैं जाटनी हरयाणे की

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

तू छोरा नंदबाबा का मैं जाटनी हरयाणे की,

जाटनी हरयाने की मैं हाथ नहीं आने की,

गुजरिया की चुनरी घाट के,

मेरे चुनरी के तू हाथ तो लगा...

गुजरिया की तू दही खिंढावै,

मेरी मटकी के तू हाथ तो लगा...

गुजरिया का माखन खावे,

मेरी घिलड़ी के हाथ तो लगा....

गुजरिया की तू कलाई मरोड़े,

मेरी ऊँगली के हाथ तो लगा....

गुजरिया के बछड़े चरावे,

मेरे कटड़े के हाथ तो लगा....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।