मैं फिर भी तुम को चाहुगा

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

तुम आज मेहर बहाओ बाबा

कल शयाद तेरी मेहर न रहे,

मैं जो कुछ हु तेरी रहमत है

कल शयद उसका अशर न रहे,

यह आंख तेरी तरफ फिर जाये,

तू साथ न मेरे नजर आये,

मैं फिर भी तुम को चाहुगा ॥

तुम्हे दिल से मैं न भुलाउ गा,

मेरी सास चले तेरे भजनों से

मरते दम तक गाऊ गा,

मैं फिर भी तुम को चाहुगा ॥

तुम्हे दिल से मैं न भुलाउ गा,

नजरे कर्म तू रखो न रखो,

मेरा नजरिया रहे गा वाही,

तेरे गम से जिया अब तक आगे वि जरिया रहेगा वही,

कैसा पियालम को भला जो मिला क्या वो कम है भला

शयद एक पल का भी सुख न रहे,

शयद हसने का मुझे हक़ न रहे,

पर तेरी कसम मुजको बाबा हर हाल में मैं मुस्कराऊ गा,

मैं फिर भी तुम को चाहुगा,

तुम्हे दिल से मैं न भुलाउ गा,

जब तक रहे जिन्दगा में मेरी,

करता रहू शुकर तेरा,

तेरी ही बाते छल चल्त्री,

करता रहू जीकर तेरा,

भूलू गा न एहसान तेरा वादा है तुमसे है मेरा

चाहे लाख जमाना बह काये,

चाहे कोई भी कितना सम्जाये,

जब तक सोनू की साँस चले,

तब तक मैं खाटू आऊगा,

मैं फिर भी तुम को चाहुगा,

तुम्हे दिल से मैं न भुलाउ गा,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।