तुम्हे नाथ नहीं भूलू

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

इतनी किरपा करना तुम्हे नाथ नहीं भूलू,

मैं तेरी बदौलत हूँ ये बात नहीं भूलू...

खुशियों के उजाले में सब साथ निभाते हैं,

जब रात हो गम की तो कोई नज़र ना आते हैं,

उस वक़्त दिया तुमने मेरा साथ नहीं भूलू,

इतनी किरपा करना तुम्हे नाथ नहीं भूलू....

कितने ही अपनों से तुमने मिलवाया है,

नफरत के पुतले को प्रभु प्रेम सिखाया है,

जो तुमसे भरे दिल में जज़्बात नहीं भूलू,

इतनी किरपा करना तुम्हे नाथ नहीं भूलू....

अपनों को भीड़ में जब तन्हाई ने घेरा था,

कहने को थे सब अपने पर कोई ना मेरा था,

तुमने ही रखा उस पल सर पे हाथ नहीं भूलू,

इतनी किरपा करना तुम्हे नाथ नहीं भूलू....

बेकार था बेबस था गुमनाम जहाँ में था,

सोनू मुझे याद रहे था कौन कहाँ मैं था,

कितना ही नाम मिले औकात नहीं भूलू,

इतनी किरपा करना तुम्हे नाथ नहीं भूलू....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।