बावा लाल दा जन्मदिन

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

बावा लाल दा जन्मदिन आया के होने बधाइयां सारिया नु होन बधाइयां,

दिन शगना वाला आया के सब ने मिलके अज मनाया के होन बधाइयां,

सारिया नु होन बधाइयां...

ध्यानपुर बजी बधाई जय हो,

संगत नचदी आई जय हो,

खुशियां दे ढोल बजाओ जय हो,

नाले दूज मनाओ के होने बधाइयां,

बाबा लाल दा जन्मदिन आया के होन बधाइयां सारिया नु होन बधाइयां...

बावा लाल जी पालनहार कहांदे,

सबदी विपदा आप मिटांदे,

सबदी चोली विच फल पांदे,

साडे लाल जी जय जय बावा लाल जी,

बाबा लाल दा जन्मदिन आया के होन बधाइयां सारिया नु होन बधाइयां...

बिन मंगाया बिन मंगाया असि पाया,

साहनु भव तो पार लगाया आज दिन कर्मा वाला आया,

मैं वारि जावा जी गुरु जी तो वारि जावा जी,

गुरु जी दा जनम दिन आया नि होन वधाईयां,

घर घर वजी बधाई संगत नचदी आई,

खुशियां दे ढोल वजाओ रल मिल नचो गाओ,

नि होन वधाईयां,

गुरु जी दा जनम दिन आया नि होन बधाइयां.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।