साई सांवरिया की पालकी

पारंपरिक
महादेव भजन साईं भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

भाजे रे शंख भाज भाजे रे ढोल ताशे,

बरसे वरखा गुलाल की,

निकलि रे निकलि रे निकलि रे निकलि रे,

निकलि रे निकलि रे मोरे साई सांवरिया की पालकी॥

नाचे रे देव नाचे, नाचे महादेव नाचे,

चढ़ गई मस्ती धमाल की,

निकलि रे निकलि रे निकलि रे निकलि रे,

निकलि रे निकलि रे मेरो साई सांवरिया की पालकी॥

सज रही पालकी सूरज चंदा से,

मुख पे गुलाब सजे रजनीगंधा से,

आवे जी आवे.. खुशबू नशीली अँधेरी रात भी हो रंगीली,

आते है सुख आते जाते है दुःख जाते,

देखो जी लीला कमाल की,

साई सांवरिया की पालकी....

सब से आगे है गणपति चलते,

जिनके नाम से विघन है टलते,

ब्रह्मा जी विष्णु.. शंकर जी गावे,

हम तीनो साई के अंदर समावे,

भक्ति जगा के कन्धा लगा के होगे माला माल जी,

साई सांवरियां की पालकी......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।