प्रभु तूने कैसी रीत बनाई

पारंपरिक
अन्य भजन विविध भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

क्यों रे प्रभु तूने कैसी रीत बनाई,

1 दिन के पीछे यह रात बनाई॥

तूने पानी में पृथ्वी बनाई,

जैसे दूध पर छाई मलाई,

बिना खंबा खड़े आकाश टिके,

तूने पृथ्वी आकाश की डोर बधाई,

1 दिन के पीछे यह रात बनाई.....

तूने सूरज भी कैसा बनाया,

उसकी किरणों में तेज भराया,

चांद दूल्हा बना रात ब्याहन चला,

तूने तारों की कैसी बारात सजाई,

1 दिन के पीछे रात बनाई....

इस दाता की माया गजब थी,

जो कण-कण में ऐसे समाई थी,

मस्त मस्त गर्मी मस्त मस्त सर्दी,

तूने बादल के संग बरसात बनाई,

1 दिन के पीछे यह रात बनाई....

पशु-पक्षी भी तूने बनाए,

जीव जंतु के जोड़े बनाए,

देखो हंस हंसिनी देखो नाग नागिनी,

तूने पुरुषों के संग में यह नारी बनाई,

1 दिन के पीछे यह रात बनाई....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।