कुछ कर्म जगत में कर ऐसे

पारंपरिक
अन्य भजन विविध भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

कुछ कर्म जगत में कर ऐसे,

तेरे तीनों लोक संवर जायें,

तू हसे ये जग रोये पगले,

जब सफर ये ख़तम हो जाए,

कुछ कर्म जगत में कर ऐसे,

तेरे तीनों लोक संवर जायें॥

पैसा पैसा तूने जोड़ा यहाँ,

मन का तूने चैन भी खोया है,

जब काम न आये अंत समय.

बेकार ये सारी माया है,

प्रभु भक्ति में इस मन को लगा,

शायद भगवान मिल जाये,

कुछ कर्म जगत में कर ऐसे....

तन को तूने धोया मल मल कर,

मन को तू साफ न कर पाया,

गया गँगा नहाने को जब भी,

संग पाप की गठरी ले आया,

मुख से जो तू बोले हरि हरि,

भव सागर पल में तर जाये,

कुछ कर्म जगत में कर ऐसे....

ये जीवन एक छलावा है,

कभी दुःख तो कभी सुख आना है,

चाहे रात हो काली अंधियारी,

एक दिन तो सवेरा आना है,

अपनी मंजिल को वो पाता,

जो सतमार्ग जो अपनाये,

कुछ कर्म जगत में कर ऐसे....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।