हे मेरे शंकरा

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

तेरी जटा से बहती रहते है गंगा की धरा शंकरा हे मेरे शंकरा,

तेरी जटा से बहती रहते है गंगा की धरा शंकरा हे मेरे शंकरा......

खाने को है कंद मूल पीने को भंग है,

उड़ते रहते है बार बार बारी के तरंग है...-2

कानो में कुण्डल सुन्दर सोहे, गले नाग की माला शंकरा हे मेरे शंकरा,

तेरी जटा से बहती रहते है गंगा की धरा शंकरा हे मेरे शंकरा………

हाथो में त्रिशूल सोहे मस्तक पर चंद्र है

पहने है मृग छाला भोले नील कंठ रंग है....-2

गौरी संग में साथ गणपति, रहते है कैलाशा शंकरा हे मेरे शंकरा,

तेरी जटा से बहती रहते है गंगा की धरा शंकरा हे मेरे शंकरा....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।