वन वन फिरत अकेले राम

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

वन वन फिरत अकेले राम अपना नहीं कोई...-4

सास के जाए जेठ मेरे होते...-2

लाज घुंघट कर लेती राम अपना नाहै कोई,

वन वन फिरत अकेले राम अपना नहीं कोई...

सास के जाए देवर मेरे होते...-2

मन की बदला लेती राम अपना नाहै कोई,

वन वन फिरत अकेले राम अपना नहीं कोई...

सास की जाई ननद मेरे होती...-2

झुकके पैर पढ़ लेती राम अपनों नाहै कोई,

वन वन फिरत अकेले राम अपना नहीं कोई...

मां के जाए बिरन मेरे होते...-2

माथे तिलक कर देती राम अपना नाहै कोई,

वन वन फिरत अकेले राम अपना नहीं कोई...

कोख के जाए लाल मेरे होते...-2

लाड प्यार कर लेती राम अपना नाहै कोई,

वन वन फिरत अकेले राम अपना नहीं कोई...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।