खाटूवाला वो लीले घोड़े वाला

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

खाटूवाला-खाटूवाला वो लीले घोड़े वाला,

रोम रोम मे रमा हुआ है, तेरी ज्योत का आला रे आला,

खाटूवाला-खाटूवाला वो लीले घोड़े वाला॥

भीमसेन के पौत्र लाडले अहलवती के लाला,

पाण्डव कुल अवतार श्याम जी, जपूँ तिहारी माला रे माला,

खाटूवाला-खाटूवाला वो लीले घोड़े वाला॥

रे बालक तू क्या करने को युद्ध भूमि मे आया,

ये बच्चों का खेल नही है तेरी छोटी काया रे काया,

खाटूवाला-खाटूवाला वो लीले घोड़े वाला॥

तीन बाण ले महाभारत का युद्ध देखने आया,

छोटे से बालक को देखकर श्री कृष्ण बतलाया बतलाया,

खाटूवाला-खाटूवाला वो लीले घोड़े वाला॥

सुनकर के आवाज प्रभु की बालक यू फरमाया,

हारेगा उस ओर लडूँगा अहलवती का जाया रे जाया,

खाटूवाला-खाटूवाला वो लीले घोड़े वाला॥

वीर पराक्रम कोई दिखाओ गर्व तुम्हारा माने,

एक बाण से वृक्ष के पत्ते सब छेदों तो जाने रे जाने,

खाटूवाला-खाटूवाला वो लीले घोड़े वाला॥

महाशक्ति का सुमिरण करके उसने बाण निकाला,

पत्ते छेदे उस तरुवर के अपना प्रण ना टाला रे टाला,

खाटूवाला-खाटूवाला वो लीले घोड़े वाला॥

श्री कृष्ण से वचन बद्ध हो शीश दान दे डाला,

तेरी महिमा कोई ना जाने तू है देव निराला निराला,

खाटूवाला-खाटूवाला वो लीले घोड़े वाला॥

तेरी शरण में आये बाबा हम सबको अपना ले,

आलूसिंह जी की यही कामना रंग में तेरे मिलाले मिलाले,

खाटूवाला-खाटूवाला वो लीले घोड़े वाला॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।