तू टेर लगाले सांवरिया ने

संत सूरदास
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

कोई आवे या ना आवे,

यो आडे आसी जी,

तू टेर लगाले सांवरिया ने,

दौड़यो आसी जी,

कोई आवे या ना आवै.....

सूझे ना जद रस्तो कोई,

हो ज्या मनड़ो अधीर,

घायल मन की बात यो सुण सी,

आय बंधा सी धीर,

धीर बंधा सी बाबो,

सर पर हाथ फिरा सी जी,

तू टेर लगाले सांवरिया ने,

दौड़यो आसी जी,

कोई आवे या ना आवै.....

रोवे जद आंखड़लया थारी,

टप टप टपके नीर,

टप टप टपके नीर,

एक एक आँसू ने पौंछे,

दूर भगावे पीर,

दूर भगावे पीर,

पौंछ आंसूड़ा थारा,

पौंछ आंसूड़ा थारा,

हिवड़े लिपटा सी जी,

तू टेर लगाले सांवरिया ने,

दौड़यो आसी जी,

कोई आवे या ना आवै.....

सूरदास मीरा कर्मा सब,

कह गया संत फ़कीर,

लाज बचाई थी द्रोपदी की,

नानी बाई को बीर,

यो चेतन कर सी जीवन,

भव पार लगा सी जी,

तू टेर लगाले सांवरिया ने,

दौड़यो आसी जी,

कोई आवे या ना आवै.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।