कैसे तुझे मैं रिझाऊँ

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

राम नाम सच,

बाकी झूठा रे,

तू ही खरा बाकी सब खोटा रे,

कैसे तुझे मैं पुकारूँ,

कैसे तुझे मैं रिझाऊँ,

मेरे राम जी तुझसे,

कैसे नाता जोड़ूँ,

कैसे तुझे मैं पुकारूँ,

कैसे तुझे मैं रिझाऊँ,

कैसे तुझे मैं पुकारूँ,

कैसे तुझे मैं रिझाऊँ.....

मैली हो गई मोरी चदरिया कैसे दाग मिटाऊँ,

मैली हो गई मोरी चदरिया कैसे दाग मिटाऊँ,

मैं हूँ दोषी मैं हूँ पापी,

कैसे तेरे द्वारे आऊँ,

कैसे तेरे द्वारे आऊँ,

मेरे राम जी तुझसे,

कैसे नाता जोड़ूँ,

कैसे तुझे मैं पुकारूँ,

कैसे तुझे मैं रिझाऊँ,

कैसे तुझे मैं पुकारूँ,

कैसे तुझे मैं रिझाऊँ....

तेरे आगे मैं हूँ समर्पित,

अब जो चाहे सज़ा दे,

तेरे आगे मैं हूँ समर्पित,

अब जो चाहे सज़ा दे,

डाल कृपा की दृष्टि हे दाता,

मेरी सारी बिगड़ी बना दे,

जग से मुक्ति दिला दे,

मेरे राम जी तुझसे,

कैसे नाता जोड़ूँ,

कैसे तुझे मैं पुकारूँ,

कैसे तुझे मैं रिझाऊँ,

कैसे तुझे मैं पुकारूँ,

कैसे तुझे मैं रिझाऊँ,

कैसे तुझे मैं पुकारूँ,

कैसे तुझे मैं रिझाऊँ.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।