साई तुम मिल गए

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॥ पावन पाठ ॥

मैंने माँगा था क्या मुझको क्या मिल गया,

मैंने माँगा था क्या मुझको क्या मिल गया,

साई तुम मिल गए तो खुदा मिल गया,

साई तुम मिल गए तो खुदा मिल गया……..

साई मेरा साई मेरा साई नाथ है ……

मेरी रहो में कांटे बहुत थे मगर,

साई बाबा ने मुझको सहारा दिया….-2

मैंने माँगा था क्या मुझको क्या मिल गया,

साई तुम मिल गए तो खुदा मिल गया…-2

मैंने माँगा था क्या मुझको क्या मिल गया….

साई मिल गया ….

आँधियों ने भी रोक था रास्ता मगर,

मैं न रुक पाया साई तेरे नाम पर….-2

आपको पा लिया तो जहाँ मिल गया…-2

साई तुम मिल गए तो खुद मिल गया…-2

मैंने माँगा था क्या मुझको क्या मिल गया….

साई मेरा साई मेरा साई नाथ है…..

जिंदगी मेरी साई का इनाम हो,

जिस्म में जान है साई का दान है…-2

एक हमसर को भी हौसला मिल गया…-2

साई तुम मिल गए तो खुद मिल गया…-2

मैंने माँगा था क्या मुझको क्या मिल गया......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।