रहम नजर करो अब मोरे साई

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॥ पावन पाठ ॥

रहम नजर करो अब मोरे साई, तुम बिन नहीं मुझे माँ बाप भाई,

रहम नजर करो अब मोरे साई, तुम बिन नहीं मुझे माँ बाप भाई,

रहम नजर करो……….

मैं अँधा हूँ बंदा तुम्हारा, मैं अँधा हूँ बंदा तुम्हारा,

मैं ना जानू मैं ना जानू, मैं ना जानू मैं ना जानू,

अल्लाह इलाही,

रहम नजर करो अब मोरे साई, तुम बिन नहीं मुझे माँ बाप भाई,

रहम नजर करो अब मोरे साई, तुम बिन नहीं मुझे माँ बाप भाई,

रहम नजर करो………..

खाली ज़माना मैंने गवाया, खाली ज़माना मैंने गवाया,

साथी आखिर का साथी आखिर का, साथी आखिर का साथी आखिर का,

किया ना कोई,

रहम नजर करो अब मोरे साई, तुम बिन नहीं मुझे माँ बाप भाई

रहम नजर करो अब मोरे साई, तुम बिन नहीं मुझे माँ बाप भाई

रहम नजर करो……….

अपने मशीद का झाडू घनोह है अपने मशीद का झाडू घनोह है,

मालिक हमारे मालिक हमारे मालिक हमारे मालिक हमारे,

तुम बाबा साई,

रहम नजर करो अब मोरे साई, तुम बिन नहीं मुझे माँ बाप भाई,

रहम नजर करो अब मोरे साई, तुम बिन नहीं मुझे माँ बाप भाई,

रहम नजर करो……..

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।