परम पिता से प्रीत लगा

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

परम पिता से प्रीत लगा भवसागर से पार हो जा....-2

सत्संग में नित जाया कर, गुण ईश्वर के गाया कर,

मन अपने को शुद्ध बना, भवसागर से पार हो जा,

परम पिता से प्रीत लगा....

अंदर है प्रीतम तेरा, मन मंदिर में है डेरा,

मन में ज्ञान की ज्योति जगा, भवसागर से पार हो जा,

परम पिता से प्रीत लगा....

विषयों की चल रही अंधेरी, जिस ने बुझाई ज्योति तेरी,

इससे अपना आप बचा, भवसागर से पार हो जा,

परम पिता से प्रीत लगा....

ऐ मानव विषयों को छोड़, परमेश्वर से नाता जोड़,

जीवन वेद अनुसार बना, भवसागर से पार हो जा,

परम पिता से प्रीत लगा....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।