पाईयां तेरे दर तो मैं रेहमता हज़ारा

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॥ पावन पाठ ॥

पाईयां तेरे दर तो मैं रेहमता हज़ारा,

दिन रात दाता तेरा शुक्र गुजारा॥

कौड़ीया दा मुल नहीं सी, हीरेया दा पै गया,

जदो दा मैं दाता तेरे चरना च बह गया...-2

प्रभु नाम बोलण मेरे दिल दिया तारां,

पाईयां तेरे दर तो मैं....

रेहमता नु देख अखां हंस पईया रोंदिया,

साडे कोलो दाता तेरिया सिफ्ता ना होन्दिया....-2

क्यों ना दाता तेरे उत्तो तन मन वारा,

पाईयां तेरे दर तो मैं....

दर दर रुलदे सी, किसे ना सम्भालेया,

मेहर किती सतगुरु, चरणा नाल ला लया...-2

चंगे वेले सुन लईया साडिया पुकारा,

पाईयां तेरे दर तो मैं....

जिंदगी दे जीने दा, आया कोई वल ना,

होया मुसीबता दा, तेरे बिना हल ना....-2

तैनू छड दातिया मैं किस नु पुकारां,

पाईयां तेरे दर तो मैं....

सुख देयो दुःख देयो झोली विच्च पा लवां,

दुख नु वी दातेया मैं सुखा च रला लवां...-2

जेह्ड़ी वी घडी आवे हस के गुजारा,

पाईयां तेरे दर तो मैं....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।