थारो टाबर भोलो मां

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॥ पावन पाठ ॥

थारो टाबर भोलो मां,

म्हारो जन्म सुधारो मां,

भुजलंब दया करके,

अब आय उबारो मां॥

म्हारो कौन धणी देवी,

बस थारो सहारो है,

विपदा सू घिरयोडो मां,

ओ टाबर थारो है,

म्हारे हर एक संकट को,

कर द्यो निस्तरो मां,

भुजलंब कृपा करके,

अब आय उबारो मां॥

दुष्मी पग पग फैल्या,

नित रोज सतावे मां,

मझधार म्हारी नैया,

कुण पार लगावे मां,

लहरा को डर लागे,

अब बांह पसारो मां,

भुजलंब दया करके,

अब आय उबारो मां॥

मैं जानूँ कुछ भी ना,

रखो जियां रह ज्याऊं,

दर छोड़ थारो करणी,

कुणसे दर मैं जाऊ,

थारे ही चरना में,

है जीवन सारो मां,

भुजलंब दया करके,

अब आय उबारो मां॥

प्रांजल और देव थारै,

दर शीश निवावै मां,

सेवक ओ रामोतार,

गुण थारा गावै मां,

सुख दुख रा थे संगी,

एक शरणो थारो मां,

भुजलंब दया करके,

अब आय उबारो मां॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।